अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सामाजिक न्याय आयोग IHRSJC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.संतोष बजाज द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए ऑनलाइन गेमिंग और ऑनलाइन जुआ पर प्रतिबंध लगाकर उसपर कठोर कानून बनाने के निवेदन पत्र का लिया संज्ञान.
डॉ.संतोष बजाज का प्रयास हुआ सफल गुरुवार 21 अगस्त 2025 को देर रात संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में ऑनलाइन गेमिंग के संवर्धन और विनियमन विधेयक को पारित कर दिया गया इसके लिए डॉ.बजाज ने केंद्र सरकार का दिल से आभार व्यक्त किया.
जनहित में किए गए इस प्रयास के लिए देश के हर तरफ से डॉ.संतोष बजाज की हो रही है सराहना.
नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सामाजिक न्याय आयोग IHRSJC के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा इंटरनेशनल सोशल सेलिब्रिटी डॉ.संतोष बजाज ने भारत देश की जनता विशेषरूप से युवा एवं बच्चों के सुरक्षित भविष्य के हित में सराहनीय कार्य कर एक बार फिर साबित कर दिया वह एक सच्चे जनसेवक है, डॉ.संतोष बजाज ने पिछले माह 21 जुलाई 2025 को केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी की मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर मेल किया जिसमें देश में धड़ल्ले से चल रहे ऑनलाइन मनी गेमिंग और ऑनलाइन जुआ का प्रकोप और उससे युवा पीढ़ी व बच्चों पर पढ़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए साथ ही इन ऑनलाइन मनी गेमिंग एवं ऑनलाइन जुआ से हर दिन लोगों में विशेषरूप से युवा व बच्चों में बढ़ते आत्महत्या के मामलो को भी देखते हुए उन सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग व ऑनलाइन जुआ पर प्रतिबंध लगाने तथा उसके खिलाफ सख्त कानून बनाने मांग कि गई जिसमें मांग किए गए मुख्य बिंदु इस प्रकार थे, (1) सभी ऑनलाइन जुए (Teen Patti, Rummy आदि) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। (2) प्रत्येक ऐप पर 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को रोकने हेतु KYC व आयु सत्यापन अनिवार्य किया जाए (3) डिजिटल गेमिंग की समय सीमा तय की जाए एवं पेरेंटल कंट्रोल सिस्टम लागू किया जाए (4) विद्यालय स्तर पर डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य व जोखिमों पर अनिवार्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। (5) मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से हर जिले में सुलभ किया जाए। (6))ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी ऐप्स एवं वेबसाइट्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। (7) ऐसे ऐप्स को प्रमोट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स व चैनलों पर कार्रवाई की जाए। (8) युवाओं को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जाए। (9) प्रत्येक राज्य में Anti-Gambling Task Force गठित की जाए। (10) जुआ से संबंधित अन्य देशों से संचालित नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जाए।
केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता लेते हुए तथा मेल पर भेजे गए पत्र का संज्ञान लेते हुए गुरुवार 21 अगस्त 2025 को देर रात संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में ऑनलाइन गेमिंग और ऑनलाइन जुआ के संवर्धन और विनियमन विधेयक को भी पारित कर दिया गया और अब ऑनलाइन मनी गेमिंग और ऑनलाइन जुआ वालो की खर नहीं रहेगी. संसद द्वारा 21 अगस्त 2025 को पारित ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 , नागरिकों को ऑनलाइन मनी गेम्स के खतरे से बचाने के साथ-साथ अन्य प्रकार के ऑनलाइन गेम्स को बढ़ावा देने और विनियमित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून त्वरित धन कमाने के भ्रामक वादों पर फलने-फूलने वाले शिकारी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की लत, वित्तीय बर्बादी और सामाजिक संकट को रोकने के लिए बनाया गया है। यह डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और रचनात्मक विकास की ओर ले जाते हुए परिवारों की सुरक्षा के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
जनहित एवं युवा बच्चों के सुरक्षित व उज्वल भविष्य के लिए डॉ.संतोष बजाज का प्रयास हुआ सफल इस प्रयास के लिए डॉ.बजाज की देश हर तरफ सराहना की जा रही और उनको बधाईयां दी जा रही है.
डॉ.संतोष बजाज ने केंद्र सरकार का दिल से आभार प्रकट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता लेकर और जल्द ही इसके खिलाफ कठोर कदम उठाकर विधेयक पारित कर सख्त कानून बनाया यह राष्ट्रहित एवं जनहित में किया गया एक सराहनीय कदम है अब यह कानून युवाओं और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का काम करेगा और लाखों परिवार जो ऑनलाइन गेमिंग की लत से टूट चुके थे, उनके लिए यह निर्णय आशा की किरण है साथ ही यह कानून बच्चों को गलत रास्ते से बचाकर उनको उज्ज्वल भविष्य प्रदान करेगा.
एक नजर पारित किए गए विधेयक पर,
विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके प्रमुख कारण हैं ;
लत और आर्थिक बर्बादी : ऑनलाइन पैसे वाले गेम जुनूनी जुआ खेलने को बढ़ावा देते हैं। कई खिलाड़ी तुरंत मुनाफ़े के चक्कर में अपनी सारी जमा-पूंजी गँवा देते हैं। परिवार कर्ज़ और संकट में फंस गए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्याएँ : भारी आर्थिक नुकसान के तनाव के कारण अवसाद और यहाँ तक कि आत्महत्या के मामले भी बढ़े हैं। इस विधेयक का उद्देश्य इन शोषणकारी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाकर ऐसी त्रासदियों को रोकना है।
धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग ; कई प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग, जिसका अर्थ है अवैध कमाई को कानूनी माध्यमों से स्थानांतरित करके उसका स्रोत छिपाना, एक बड़ी चिंता का विषय रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा : जांच से पता चला है कि कुछ गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध संदेश भेजने के लिए किया जा रहा था, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।
कानूनी खामियों को दूर करना : भारतीय न्याय संहिता, 2023 जैसे भारतीय कानूनों और विभिन्न राज्य विधानों के तहत जुआ और सट्टेबाजी पर पहले से ही प्रतिबंध है। लेकिन ऑनलाइन क्षेत्र अभी भी काफी हद तक अनियमित बना हुआ है। विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि भौतिक और डिजिटल दोनों ही क्षेत्रों में समान मानक लागू हों।
स्वस्थ विकल्पों को प्रोत्साहित करना : विधेयक सकारात्मक डिजिटल जुड़ाव के लिए भी जगह बनाता है। ई-स्पोर्ट्स को एक वैध खेल के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि कौशल और सांस्कृतिक मूल्यों का निर्माण करने वाले सामाजिक और शैक्षिक खेलों को सरकारी समर्थन प्राप्त होगा।
अपराध और दंड का प्रावधान ;
सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश या सुविधा प्रदान करने पर तीन साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इन खेलों से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी समान दंड का प्रावधान है। ऐसे खेलों का विज्ञापन करने पर दो साल तक की जेल और पचास लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
बार-बार अपराध करने वालों को कड़ी सज़ा का सामना करना पड़ेगा, जिसमें पाँच साल तक की कैद और दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। प्रमुख प्रावधानों के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ़्तारी कर सकती है और ज़मानत का अधिकार नहीं होगा।
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विधेयक प्रेस नोट विवरण: प्रेस सूचना ब्यूरो PIB HQ DELHI,